उत्तर प्रदेशनोएडा

नोएडा में हिंडन किनारे भूजल में जहरीली धातुएं! 150 मीटर गहराई तक पानी दूषित, रैनीवेल योजना पर लगा ब्रेक

आर्सेनिक, सीसा और क्रोमियम की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता, सर्वे में पानी इस्तेमाल के योग्य नहीं मिला; हिंडन के आसपास रहने वाले लोगों को शुद्ध पानी की आपूर्ति बड़ी चुनौती

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Hindon River Groundwater Contamination: नोएडा में हिंडन नदी के आसपास भूजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। नोएडा प्राधिकरण के हाइड्रोलॉजी सर्वे में नदी के किनारे जमीन के नीचे करीब 150 मीटर की गहराई तक पानी दूषित पाए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच के मुताबिक, भूजल में आर्सेनिक, सीसा और क्रोमियम जैसी जहरीली धातुओं की मौजूदगी मिली है। इसके चलते हिंडन किनारे रेनीवेल बनाने की योजना पर रोक लग गई है।

जहरीले भूजल ने रोकी रेनीवेल परियोजना

नोएडा प्राधिकरण ने यमुना किनारे बने रेनीवेल की तर्ज पर हिंडन नदी के आसपास भी पानी की आपूर्ति बेहतर करने की योजना बनाई थी। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों तक बेहतर गुणवत्ता वाला पानी पहुंचाना था, जहां गंगाजल की आपूर्ति बाधित होने पर नलकूपों के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि, रैनीवेल की संभावना तलाशने के लिए कराए गए भूजल सर्वे में पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर समस्या सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक, जांच में करीब 150 मीटर गहराई तक का पानी भी इस्तेमाल के योग्य नहीं पाया गया। ऐसे में हिंडन की तलहटी में रैनीवेल लगाने की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है।

इन सेक्टरों में पानी की गुणवत्ता बनी चिंता

नोएडा क्षेत्र में हिंडन नदी सेक्टर-63 के बहलोलपुर से सेक्टर-168 के सामने तक करीब 23 किलोमीटर बहती है। इसके आसपास बहलोलपुर, पर्थला, सोहरखा और सेक्टर-63, 121, 123, 146, 150 व 168 जैसे इलाके स्थित हैं। इन क्षेत्रों में यमुना किनारे के रैनीवेल का पानी नहीं पहुंच पाता। गाजियाबाद से गंगाजल की आपूर्ति रुकने पर कई जगह नलकूपों से पानी सप्लाई किया जाता है। इस पानी में टीडीएस का स्तर 1500 से 2200 तक बताया गया है, जबकि यमुना किनारे के रैनीवेल के पानी में यह स्तर करीब 400 से 500 रहता है।

अब शुद्ध पानी की आपूर्ति कैसे होगी?

नोएडा प्राधिकरण के जल विभाग के प्रभारी महाप्रबंधक आरपी सिंह के मुताबिक, हिंडन किनारे रैनीवेल बनाने की संभावना जांचने के लिए भूजल सर्वे कराया गया था। जांच के नतीजों ने योजना के सामने मुश्किल खड़ी कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि हिंडन के आसपास रहने वाले लोगों को बेहतर गुणवत्ता वाला पानी उपलब्ध कराने के लिए प्राधिकरण क्या विकल्प अपनाएगा। दूषित भूजल की समस्या के बीच सुरक्षित पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन गया है।

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